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One was the brave warrior Jograj Gurjar एक था वीर योद्धा जोगराज गुर्जर

एक था वीर योद्धा जोगराज गुर्जर One was the brave warrior Jograj Gurjar

जोगराज गुर्जर जिला सहारनपुर बहुत ही प्रसिद्ध हुआ है। वह हरियाणें की सर्वखाप पंचायत का मुख्य सेनापति था। वह बड़ा बलवान और वीर था। उसका शरीर अत्यंत सुन्दर और सुदृढ़ था। उसमें 64 धड़ी (320 किलो) अर्थात 8 मण पक्का भार था। इसने '''ज्वालापुर''' के निकट पथरी रणक्षेत्र में 'तैमूरलंग' से भयंकर युद्ध किया था।

जोगराज खूबड़ परमार वंश' गुर्जर जाति के यौद्धेय थे| इन्होने दादा मानसिंह के यहां सन 1375 ईस्वी में हरिद्वार के पास गाँव कुंजा सुन्हटी में अवतार लिया था| बाद में यह गाँव मुगलों ने उजाड़ दिया तो वीर जोगराज सिंह के वंशज उस गांव से चल लंढोरा (जिला सहारनपुर) में आकर आबाद हो गये, जहां कालांतर में लंढोरा गुर्जर राज्य की स्थापना हुई। ये अपने समय के उत्तर भारत के भीम कहे जाते थे, इनका कद 7 फुट 9 इंच और वजन 8 मन (320 किलो) था। ये विख्यात पहलवान थे इनकी दैनिक खुराक 4 सेर अन्न, सब्बी-फल, 1 सेर गऊ का घी और 20 सेर गऊ का दूध था ।

खापसेना की महिला-विंग की 5 सेनापति 
दादीराणी रामप्यारी गुर्जरी
दादीराण…

Jungle talk जंगल की बात

Jungle talk जंगल की बात 
बीकानेर को मरुनगरी भी कहा जाता है क्योंकि यह थार रेगिस्तान का महत्वपूर्ण भू -भाग है। मेरे कॉलेज में घुसते ही करीब 4 हेक्टेयर (16 बीघा) जमीन पर फैला एकदम हरा-भरा जंगल आगंतुकों का हरित सत्कार करता है। इस जंगल का एक छोटा सा इतिहास है। करीब साठ साल पहले राजकीय डूंगर कॉलेज को शहर के भीतरी हिस्से से वर्तमान परिसर में स्थानांतरित किया गया था |

लेकिन सन् 2003 में जब मेरा स्थानांतरण इस कॉलेज में हुआ तब यहाँ साठ पेड़ भी नहीं थे जिन्हें देखकर मेरे मन में विचार आया कि अगर हर साल एक पेड़ भी लगाया जाता तो भी मौजूदा पेड़ों से ज्यादा पेड़ यहां नजर आते ।आश्चर्य की बात यह थी कि 90 के दशक में तत्कालीन प्राचार्य श्री दलीप सिंह जी द्वारा लगवाए गए नीम के पेड़ भी एक-एक कर मर रहे थे जिनकी किसी को कोई परवाह नहीं थी।

मैंने तत्कालीन प्राचार्य महोदय से निवेदन किया लेकिन उन्होंने मेरी बात को अनसुना कर दिया तब मैंने मेरे स्तर पर उन पेड़ों को बचाने की कौशिश शुरू की। मेरे एम. ए. के विद्यार्थियों की मदद से मैं उन सब पेड़ों को बचाने में सफल हो गया। इसी दरम्यान मैंने कुछ नए पौधे भी लगाकर उनकी देखभाल …

Maharaja Suraj Mal: ​​An outstanding figure महाराजा सूरजमल: एक श्रेष्ठ शख्सियत

महाराजा सूरजमल: एक श्रेष्ठ शख्सियत Maharaja Suraj Mal: An outstanding figure

जन्म: 13 फरवरी 1707,ताजपोशी : 22 मई 1755, डीग में,वीर -गति: 25 दिसम्बर 1763,अट्ठारवीं शताब्दी को भारतीय इतिहास की सबसे अस्थिर, उथल-पुथल से भरी और डांवाडोल शताब्दी माना जा सकता है।
इस शताब्दी के जिस रियासती शासक में वीरता, धीरता, गम्भीरता, उदारता,सतर्कता, दूरदर्शिता, सूझबूझ,चातुर्य और राजमर्मज्ञता का सुखद संगम सुशोभित था, वह था महाराजा सूरजमल। मेल-मिलाप और सह-अस्तित्व तथा समावेशी सोच को आत्मसात करने वाली भारतीयता का वह सच्चा प्रतीक था।
भरतपुर जहां स्थित है, वह इलाका सोघरिया जाट सरदार रुस्तम के अधिकार में था। यहां पर सन 1733 में भरतपुर नगर की नींव डाली गई। सन 1732 में बदनसिंह ने अपने 25 वर्षीय पुत्र सूरजमल को डीग के दक्षिण-पश्चिम में स्थित सोघर गांव के सोघरियों पर आक्रमण करने के लिए भेजा। सूरजमल ने सोघर को जीत लिया। वहाँ राजधानी बनाने के लिए किले का निर्माण शुरू कर दिया। भरतपुर में स्थित यह किला लोहागढ़ किला ( Iron fort ) के नाम से जाना जाता है। यह देश का एकमात्र किला है, जो विभिन्न आक्रमणों के बावजूद हमेशा अज…

Education of social conscience सामाजिक विवेक की शिक्षा

Education of social conscience सामाजिक विवेक की शिक्षा 

शिक्षक व्यक्तित्व के बहुत बडे दर्जे के विचारों का ऐसा खजाना है जो हमें विवेक के प्रति चेतना पैदा करता है।नित्य विवेक की सोहबत।समाज मे शिक्षा का स्थान सबसे ऊपर है ।यह हम भलीभाँति जानते है ।देशभर में इस पर खूब चिंतन -मनन होता है।लोगबाग आज पहले की तुलना में शिक्षा के प्रति ज्यादा जागरूक हो रहे है।हर गांव -ढाणी में शिक्षा की अलख जगा रहे है विवेकशील लोग।अच्छी बात है।

"शिक्षा के बारे में हम जानते क्या है ,हमें जानना क्या हैऔर जानने के लिए हमने किया क्या है?ऐसा किए बिना न तो शैक्षिक चेतना का अकाल दूर होगा और न हमारा शिक्षा के अधिकार वाला नया कानून सफल होगा।

अनूठी पुस्तक 
इस अनूठी पुस्तक में शिवरतन जी ने सरल भाषा में अपनी बात कही है।हर वर्ग के पाठकों के भीतर बात गहरी उतरती जाती है ,ऐसा हमारा विश्वास है।इसमें पढने की आदतों और पुस्तकों का विशेष उल्लेख किया गया है।

थानवी जी ने भूमिका में लिखा है -"शिक्षकों में पढने की आदत बहुत कम दिखाई देती है जबकि आवश्यकता यह है कि वे अधिक से अधिक पुस्तकें पढा करें।"
गुरुजी ने हमेशा सम्पर्क …

First happy body पहला सुख निरोगी काया

First happy body  पहला सुख निरोगी काया
अक्सर हम बचपन से ही पढ़ते आए हैं कि पहला सुख निरोगी काया और यह हकीकत भी है कि पहला सुख निरोगी काया ही होता है। लेकिन अब हम देखते हैं कि हर घर हर परिवार में किसी ना किसी के काया का कष्ट रहता ही है। यहां तक कि कुछ परिवारों में आधे से ज्यादा सदस्यों की दवाइयां चलती है यानी काया का कष्ट रहता है। क्या आपने सोचा है कि यह क्यों होता है, अगर हम अपने अतीत यानी पिछली पीढ़ियों में जाके देखे तो पाएंगे कि वह लोग हमसे ज्यादा स्वस्थ रहते थे,

बीमार नहीं होते थे और हमारे मुकाबले ताकतवर भी ज्यादा थे। इसका कारण यह है कि उस समय का खानपान नेचुरल था और इस भौतिक युग की तरह इतनी भागदौड़ नहीं थी। अच्छा खानपान होने के कारण वह स्वस्थ रहते और लंबी उम्र भी होती थी। इस वर्तमान समय में हमारा खान-पान जहरीला है क्योंकि हरित क्रांति का उद्देश्य जहां किसानों की आय बढ़ाना था, आय का तो पता नहीं क्यों कि आय तो किसानों की बढी नहीं। स्थिति पहले से और खराब है लेकिन यह जरूर हुआ है कि यहां पर लोगों के स्वास्थ्य में गिरावट आई है और बीमारियों से घिर चुके हैं। नई-नई बीमारियां होने लगी है। अ…

Biodiversity: Crisis on Language, Culture and Environment :जैव विविधता : भाषा, संस्कृति और पर्यावरण पर संकट

Biodiversity: Crisis on Language, Culture and Environment जैव विविधता : भाषा, संस्कृति और पर्यावरण पर संकट
इन दिनों जैव-विविधता पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं। जैव विविधता पर गहराता संकट पर्यावरण के साथ भाषा और संस्कृति को भी नष्ट कर रहा है। एक नए अध्ययन में दावा किया गया है कि जैव-विविधता की हानि दुनिया में भाषाओं और संस्कृतियों के नष्ट होने के लिए जिम्मेदार है। अमेरिका की पेन स्टेट यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने अपने अध्ययन में पाया कि पृथ्वी के जैवविविधताओं वाले उच्च क्षेत्रों में उच्च भाषाई विविधता भी होती है। यहां तक कि विश्व की 70 प्रतिशत भाषाएं उच्च जैवविविधता वाले स्थलों पर पाई जाती हैं। आंकड़े बताते हैं कि इन प्रमुख पर्यावरणीय क्षेत्रों में समय के साथ संस्कृति और भाषाओं के स्तर में गिरावट आई है।

शोध प्रमुख लैरी गोरेंफ्लो के हवाले से बीबीसी ने कहा, हमने ताजा भाषाई आंकड़ों के उपयोग से इस बारे में गहराई से जानने का प्रयास किया कि भाषाओं और जैव विविधता का आपसी संबंध क्या है। साथ ही यह समझने की कोशिश भी की कि भाषा का भौगोलिक रूप से विस्तार कैसा है।  दरअसल, इस दौर में जैवविविधता,भाषा…

The origin of man, the culmination of rasa, the structure of society, the construction of a building and derivation of the word : मनुष्य की उत्पत्ति, रस की निष्पत्ति, समाज की सरंचना, भवन का निर्माण और शब्द की व्युत्पत्ति होती है।

मनुष्य की उत्पत्ति, रस की निष्पत्ति, समाज की सरंचना, भवन का निर्माण और शब्द की व्युत्पत्ति होती है।
सृष्टि-उत्पत्ति के संदर्भ में ब्रह्म की इच्छा - एकोऽहं बहुस्यामि... (अर्थात् एक हूँ, अनेक हो जाऊँ) ब्रह्म की यह इच्छा या अवधारणा ही सृष्टि-निर्माण में सहायक सिद्ध हुई और उसने नानाविध, बहुरंगी, सतरंगी सृष्टि सर्जित कर दी।

उसी प्रकार भाषा के संदर्भ में एक शब्द से अनेक शब्दनिर्माण की संकल्पना उपसर्ग रूपी ब्रह्म से ही संभव हो सकती है।जिस प्रकार ब्रह्म एक ही उपादान (सामग्री) से अनेक जीवों की सृष्टि कर देता है, उसी तरह उपसर्ग भी एक ही मूलपद (धातु ) से अनेक शब्दों (पदों) का निर्माण करता है, इसी रचना साम्‍य से उपसर्ग मेरी नज़र में भाषा का ब्रह्म है।

मैं इसी अवधारणा को आज आपके सम्मुख एक 'पद्' धातु के माध्यम से बहुत ही संक्षेप में सिद्ध कर रहा हूँ।'पद्' धातु जाना, चलना - फिरना, पहुँचना, हासिल करना आदि अर्थो को प्रकट करती है, परन्तु इस एक ही पद् धातु के साथ अलग - अलग उपसर्ग जोड़ने से अनेक शब्द व्युत्पन्न हुए ।

अब देखिए - पद् धातु के साथ 'अनु' उपसर्ग लगा तो शब्द बना - अनुपद…